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बच्चों के लिए उचित दिनचर्या

बच्चों के लिए उचित दिनचर्या
तीन साल की उमर होने तक मेरे बेटे की कोई खास दिनचर्या निश्चित नहीं हो पाई थी. यह मेरे लिए चिंता का विषय था क्यूंकी उसका प्री-स्कूल जल्दी ही शुरू होने वाला था. कुछ माँओं से सलाह मशविरा करके  मैने उसकी दिनचर्या का चार्ट बनाने का निश्चय किया. मैने उसके दिन को चार भागों में विभाजित किया- सुबह, दोपहर, शाम और रात.
**सुबह** ;
सुबह बच्चों को किस समय पर उठाया जाए यह हरेक परिवार में अलग ढंग से सोचा जाता है. मेरे हिसाब से आपके बच्चे को सुबह उठाने का उचित समय 6 _ 7 के बीच होना चहिये. अलार्म लगाइए और उठाने के समय को बाहाल करने के बारे में सारा दिन सोचिए. प्रातःकालीन गतिविधियाँ जैसे कि ब्रश करवाना, पॉटी आदि अगला कदम होना चाहिए फिर उसके बाद दूध.
**दोपहर** ;
दोपहर का समय सृजनात्मक गतिविधियों में बच्चे को व्यस्त रखने का उचित समय होता है. मैं अपने बच्चे को कटिंग और पेस्टिंग, प्ले डो, बिल्डिंग ब्लॉक्स आदि में एक घंटे से ज़्यादा व्यस्त रखती हूँ. छोटे बच्चे एक बजे तक भूखे और खीजे हुए हो जाते हैं. यही समय उचित होता है जब आप बच्चे को दोपहर का खाना परोसें. और इसके बाद उनका सोने का समय हो जाता है.
**शाम**
यह समय बाहर जाने का होता है. मौसम के हिसाब से ५या ७ बजे घर से बाहर जाने का समय होता है. पार्क,साइकलिंग,स्केटिंग, बॉल गेम्स कुत्ते को टहलाना आदि खेल बच्चे की उर्जा को सही राह पर लगाने वाले होते हैं. ६.३० या ७बजे तकवापस घर जाने का समय हो जाता है ताकि घर जाकर गर्म पानी से स्नान करके धूल आदि साफ कर सकें.
**रात**
परिवार में यदि छोटे बच्चे हैं तो रात के खाने का समय जल्दी होना चाहिए. पार्क और नहाने के बाद बच्चे भूखे हो जाते हैं इसलिए उन्हे रात का खाना 8या 9 बजे के बीच परोस देना चाहिए. सोने के समय का माहौल बनाना भी महत्वपूर्ण होता है. गतिविधियाँ जैसे क़ि रात के पाजामा पहनना, बिस्तर ठीक करना, बत्तियाँ धीमी करना, सोते समय की कहानियाँ सुनाना शुरू हो जाना चाहिए. कोई भी मम्मी दिनचर्या बनाने में तुरंत ही दक्ष नहीं होती है. इसलिए अपने बच्चे की ज़रूरतों के हिसाब से दिनचर्या का टेबल बनाइए और उसे फ्रिड्ज पेर लगा दीजिए.
पर याद रखिए कि यह बच्चे की सुविधा के लिए है इसलिए  उन्हे इसके हिसाब से चलने के लिए ज़ोर मत दीजिए. यह निश्चित करिए कि टाइम टेबल में सुविधा के अनुसार थोड़ी बहुत फेर बदल की जा सके.
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